शिक्षक भविष्य का सृजनकर्ता : हरिगढ़ विभाग प्रचारक गोविंद ,विद्यार्थी कार्य विभाग ने शिक्षक दिवस पर आयोजित की शिक्षक गोष्ठी
शिक्षक राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य करता है: अतुल वत्स
हाथरस। विद्यार्थी कार्य विभाग द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन ऑडिटोरियम में शिक्षक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् गीत के साथ हुआ। इसके उपरांत मंचासीन जिलाधिकारी अतुल वत्स, पुलिस अधीक्षक चिरंजीवनाथ सिन्हा, विभाग प्रचारक गोविंद एवं जिला संघचालक डॉ. यूएस गौड़ ने भारत माता एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अतुल वत्स ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में शिक्षक का योगदान अतुलनीय है। भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना भी रहा है। उन्होंने कहा कि गूगल केवल सूचना दे सकता है, जबकि शिक्षक विद्यार्थी को सही दिशा देने का कार्य करता है। बच्चों को रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक ग्रंथों से भी परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि समाज के प्रत्येक बच्चे का अपने बच्चे की तरह पोषण और मार्गदर्शन करें। शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सेवा है।

उन्होंने कहा कि अच्छा शिक्षक वह है जो विद्यार्थी का कोर्स पूरा कराने के साथ-साथ उसके जीवन को भी सही दिशा देने का कार्य करे।
एएसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने गोष्ठी को संबोधित करते हुये गुरु-शिष्य संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुरु और शिष्य का संबंध भारतीय परंपरा में आध्यात्मिक एवं संस्कारपूर्ण संबंध माना गया है। शिक्षक राष्ट्र और समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हरिगढ़ विभाग प्रचारक गोविंद ने शिक्षकों को संबोधित करते हुये कहा कि शिक्षक बनने के बाद व्यक्ति के ऊपर सृजन की जिम्मेदारी आ जाती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाता नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण भी करता है। उन्होंने कहा कि जैसे दीपक सूर्य से प्रकाश लेकर आगे बढ़ाता है और जल अपनी मूल दिशा की ओर प्रवाहित होता है, उसी प्रकार शिक्षक को भी अपने ज्ञान और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए।
गोविन्द ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक का किरदार किसी व्यक्ति के अस्तित्व को नई दिशा देने वाला होता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक रज्जू भैया का स्मरण करते हुए कहा कि वे देश के बड़े वैज्ञानिक थे, लेकिन उन्होंने अपना जीवन व्यक्ति निर्माण और राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगाया।
गोविंद ने कहा कि शिक्षा हमारे जीवन को गढ़ने का कार्य करती है। शिक्षकों को संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि “एक ही धुन—जय जय भारत” के भाव के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।
गोष्ठी में बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने शिक्षा, संस्कार, विद्यार्थी विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार साझा किए।

