115 वां मेला श्री दाऊजी महाराज स्थित श्री वेद भगवान शिविर में हुआ मानव सम्मेलन
हाथरस। सर्वप्रथम गणपति गणेश वेद भगवान चारों वेदों के समक्ष अध्यक्ष डॉक्टर जितेंद्र शर्मा आचार्य बागीश कुमार शर्मा आचार्यस संतोष मुखिया जी पं भगवती प्रसाद शर्मा के द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर मानव सम्मेलन का शुभारंभ किया।
आचार्य संतोष मुखिया जी ने हनुमान जी द्वारा ब्राह्मण का रूप धारण कर भगवान राम के समक्ष पहुंचते ही वह समझ गए कि मेरे प्रभु है श्री राम को प्रणाम किया ऋषिमूक पर्वत पर सुग्रीव से मित्रता करा कर सीता जी की खोज करने का मार्ग प्रशस्त करने का वर्णन सुंदर रूप से प्रस्तुत किया
पं भगवती प्रसाद द्वारा राम की महिमा का अति सुंदर रूप से वर्णन किया। आचार्य वागीश कुमार शर्मा जी ने सीताजी की खोज के लिए लंका में पहुंचकर त्रिजटा राक्षसी का संघार कर लंका में प्रवेश करते हुए भव्य मंदिर ऑन तथा जगह-जगह बड़े योद्धाओं को मल युद्ध करते हुए देखा। विभीषण द्वारा बताए जाने पर अशोक वाटिका मे माता सीता को भगवान राम की मुद्रिका को डालकर माता सीता जी के चरणों में प्रणाम कर आशीर्वाद लिया।

बलशाली इंद्रजीत द्वारा हनुमान जी को ब्रह्मास्त्र से बांधकर महाराज रावण के समक्ष प्रस्तुत करना रावण तथा हनुमान जी के संवाद के पश्चात “लंका दहन” कर प्रभु जी के चरणों में सीता जी वस्तु स्थिति का बहुत ही सुंदर ढंग से चित्रण कर मानव सम्मेलन को गरिमामयी ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
अन्य भक्त जनों द्वारा अपने प्रवचनो से लाभान्वित किया।भक्त जनों में प्रमुख रूप से धीरेंद्र अग्निहोत्री, मनोज अग्निहोत्री, शैलेंद्र शर्मा, सचिन शर्मा, संतोष मुखिया जी, भगवती प्रसाद शर्मा, अतुल शर्मा, ओम शर्मा, राकेश उपाध्याय, रोहित शर्मा, विशाल शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, शिवम भारद्वाज, “युवा ब्राह्मण महासभा” सत्येंद्र स्वरुप शर्मा, बृजेश वशिष्ठ, पं गोविंद रावत, आचार्य वागीश कुमार शर्मा, कालीचरण शर्मा, आदि भक्ति जनो उपस्थित की उपस्थिति गरिमा मई रही।
आरती वंदन -आरती श्री रामायण जी की। कीरत कलित ललित सिय पी की।। गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बाल्मिक विज्ञान विशरद्।।
श्री रामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणाम। नवकंज लोचन कंज- मुख कर -कंज पद- कंजकरुण्।
व्यवस्था का कार्य भार व्यवस्थित रूप से इंजीनियर देवेंद्र स्वरूप शर्मा द्वारा किया गया की पात्र है। भक्त जनों को प्रसाद वितरण करने के उपरांत भगवान श्री रामचंद्र जी की जय हो, वेद भगवान की जय हो, धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो,8 विश्व का कल्याण हो, दाऊजी महाराज की जय, रेवती मैया की जय, आज के आनंद की जय, सत्य सनातन धर्म की जय, “पार्वती पतिये” “हर हर महादेव” “हर हर महादेव” की ध्वनि से मंदिर परिसर गूंजायमान हो उठा के साथ मानव सम्मेलन संपन्न हुआ।

