आपका रक्तदान दूसरों के जीवन का सहारा बनता है — एडीएचआर , सेठ पी.सी. बागला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विशाल रक्तदान शिविर, 61 यूनिट रक्त संग्रह
हाथरस। “आपका रक्तदान किसी जरूरतमंद के जीवन का सहारा बन सकता है”—इसी संदेश के साथ एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स (एडीएचआर) के तत्वावधान में सेठ पी.सी. बागला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हाथरस में विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डा.) महावीर सिंह छोंकर के नेतृत्व में हुआ, जिसमें महाविद्यालय के प्रोफेसरों, छात्र-छात्राओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर में 61 यूनिट रक्त संग्रह किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डा.) महावीर सिंह छोंकर ने कहा कि इस प्रकार के रक्तदान शिविर समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को आवश्यकता के समय रक्त उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से कमजोरी नहीं आती, बल्कि स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति के लिए यह सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। उन्होंने रक्तदान शिविर के आयोजन के लिए एडीएचआर टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था रक्तदान जैसे पुनीत कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है और भविष्य में भी महाविद्यालय की ओर से पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।

शिविर की मुख्य व्यवस्थापक व मार्गदर्शन मे आई.क्यूँ.एसी समिति का योगदान सराहनीय रहा।
शिविर मे प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि जब किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो उसके तीमारदार रक्त की व्यवस्था के लिए काफी प्रयास करते हैं। कई बार धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद समय पर आवश्यक रक्त समूह नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदान ही जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरक्षक आधार बनता है। उन्होंने एडीएचआर द्वारा चलाए जा रहे रक्तदान एवं रक्तदाता जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए संस्था को इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया।
एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि रक्तदान शिविर लगाना हमारा शौक नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। जब किसी जरूरतमंद व्यक्ति की ओर से रक्त की आवश्यकता के लिए कॉल आती है तो उसके रक्त समूह की व्यवस्था करना एडीएचआर की जिम्मेदारी बन जाती है। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी की कृपा से संस्था जरूरतमंदों तक रक्त पहुंचाने के प्रयास में सफल होती रही है। एडीएचआर का उद्देश्य केवल रक्त संग्रह करना नहीं, बल्कि समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता पैदा कर इसे जन-जन का अभियान बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति को नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
एडीएचआर जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने कहा कि यदि हमारे रक्त की कुछ बूंदें किसी दूसरे व्यक्ति का जीवन बचाने में सहायक बनती हैं तो इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि एडीएचआर सामाजिक सरोकारों एवं मानव सेवा के कार्यों के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है।
शिविर में महाविद्यालय के प्रोफेसरों तथा छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर रक्तदान किया। कुल 61 यूनिट रक्त संग्रह होने पर एडीएचआर पदाधिकारियों एवं महाविद्यालय प्रशासन ने सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त किया और समाज के अन्य लोगों से भी स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया।
एडीएचआर ने सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान केवल एक यूनिट रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अनजान जरूरतमंद को जीवन की उम्मीद देना है।
शिविर की व्यवस्थाओं में जिला महासचिव शैलेन्द्र सांवलिया, जिला कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल, राजेश वार्ष्णेय, रवि गुप्ता, मुरारी चौधरी, मिस प्रीती वर्मा, मिस किरण चौधरी, मिस अंकिता, डा. वीरेश कुमार शर्मा, डा. सन्तोष कुमार, डा. सन्दीप बनाल, डा. के.एन. त्रिपाठी, डा. मो. दानिश, डा. ब्रजेश सिंह कुरावाह, डा. पी.के. शर्मा, डा. दीपा ग्रोवर, डा. साहब सिंह, डा. प्रेम किशोर, डा. हरिओम सारस्वत, डा. शालिनी अग्रवाल, डा. अनीता शर्मा, समस्त IQAC सदस्य, डा. प्रीति वर्मा (अंग्रेजी), डा. पप्पू चौधरी, डा. सुनन्दा महाजन, डा. एम.पी. सिंह सहित सैकड़ों छात्र-छात्राओं एवं सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

