6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली , श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने दी पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव के पूजन मुहूर्त की जानकारी
हाथरस। शुभ कार्तिक मास में मनाए जाने वाले पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। धनतेरस, छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी), दीपावली, गोवर्धन पूजा एवं भैया दूज के अवसर पर पूजन-अर्चन, आरती-वंदन और दीपदान के श्रेष्ठ समय की जानकारी श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा (रजिस्टर्ड), हाथरस के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने सनातन धर्मावलंबियों के लिए साझा की है।
धनतेरस 6 नवंबर को
शुभ कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी शुक्रवार, संवत 2083 तदनुसार 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10:45 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल एवं रात्रि में त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहने के कारण शास्त्र सम्मत रूप से धनतेरस 6 नवंबर को ही मनाई जाएगी।

पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से रात्रि 7:57 बजे तक रहेगा। वहीं यम दीपदान के लिए शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक का समय श्रेष्ठ है। इस दौरान घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाना शुभ माना गया है।
छोटी दीपावली 7 नवंबर को
कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी शनिवार, 7 नवंबर 2026 को छोटी दीपावली एवं नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10:49 बजे से प्रारंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 11:29 बजे तक रहेगी।
इस दिन अभ्यंग स्नान अर्थात तेल लगाकर स्नान करने का शुभ समय सुबह 5:34 बजे से 6:40 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में यम दीपदान का श्रेष्ठ समय शाम 5:32 बजे से 7:56 बजे तक निर्धारित है।
दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या रविवार, शुभ संवत 2083 तदनुसार 8 नवंबर 2026 को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर की रात्रि में अमावस्या तिथि एवं प्रदोष काल विद्यमान रहने के कारण दीपावली का पर्व 8 नवंबर को मनाना शास्त्र सम्मत है।
दीपावली की संध्या को मां महालक्ष्मी, भगवान गणेश एवं कुबेर देव का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजन करने पर घर में सुख, समृद्धि, शांति एवं धन-धान्य का आगमन होता है।
महालक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात्रि 7:50 बजे तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट है। यह समय वृषभ लग्न का होने के कारण लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष शुभ माना गया है। वहीं निशीथ काल में रात्रि पूजा एवं विशेष पूजन का समय रात 11:39 बजे से 9 नवंबर की रात 12:31 बजे तक रहेगा।
दीपावली पूजन की विधि
दीपावली के अवसर पर घर को दीपकों एवं रंग-बिरंगी रोशनी से सजाकर स्वच्छ एवं पवित्र स्थान पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके साथ कलश स्थापना कर विधि-विधान से पूजन, मंत्र जाप एवं आरती-वंदन करें। पूजन के उपरांत घर के प्रत्येक कोने, मुख्य द्वार तथा तुलसी के समीप दीपक प्रज्वलित करें। परिवारजनों एवं परिचितों को दीपावली की शुभकामनाएं देकर पर्व की खुशियां साझा करें।
डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि पांच दिवसीय शरद सनातनी उत्सव भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने समस्त सनातन धर्मावलंबियों से पर्वों को श्रद्धा, उल्लास एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाने का आह्वान किया। यह जानकारी श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा (रजिस्टर्ड), हाथरस, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा द्वारा दी गई।



