करवा चौथ पर भद्रा का नहीं रहेगा कोई दोष : डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा
हाथरस। श्री वेद भगवान सनातन धर्म सभा (रजिस्टर्ड), हाथरस के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने बताया कि 29 अक्टूबर 2026 को मनाए जाने वाले करवा चौथ के पर्व पर भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा काल करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। ऐसे में व्रत और पूजा के समय भद्रा का कोई दोष नहीं माना जाएगा।
डॉ. शर्मा ने बताया कि धर्मशास्त्रीय ग्रंथ धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु के अनुसार भद्रा का विचार उसकी सक्रिय अवधि तक ही किया जाता है। भद्रा काल समाप्त होने के बाद उसका दोष प्रभावी नहीं रहता। पंचांग के अनुसार, भद्रा का प्रारंभ 28 अक्टूबर 2026 को प्रातः 5:31 बजे हुआ और इसकी समाप्ति 29 अक्टूबर 2026 को प्रातः 4:27 बजे होगी। इस गणना के अनुसार करवा चौथ की पूजा के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि सुहाग की मंगलकामना के लिए किए जाने वाले करवा चौथ जैसे पारंपरिक व्रतों में भद्रा का विचार विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की तरह नहीं किया जाता। धर्मशास्त्रों में भद्रा के निवास स्थान का भी विचार किया गया है। मान्यता के अनुसार, स्वर्ग या पाताल लोक में रहने वाली भद्रा का पृथ्वी लोक पर अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता, जबकि पृथ्वी लोक की भद्रा को विशेष परिस्थितियों में वर्जित माना गया है।
डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ने कहा कि पंचांग में उल्लिखित भद्रा की समाप्ति के समय के अनुसार 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत एवं पूजन किया जा सकता है। श्रद्धालुओं को पर्व मनाते समय स्थानीय पंचांग में दिए गए व्रत, पूजा और चंद्रोदय के समय का भी ध्यान रखना चाहिए।

