बच्चों को स्कूल जाने का रास्ता नहीं, प्लॉटों से होकर पहुंचने को मजबूर छात्र और शिक्षक, राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय के नेतृत्व में एडीएचआर टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण
हाथरस। जनपद के विकास खण्ड मुरसान स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय, मथु की बदहाल स्थिति को लेकर आज एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक हृयूमन राइट्स (एडीएचआर) की टीम ने राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय के नेतृत्व में विद्यालय का स्थलीय भ्रमण कर वास्तविक हालातों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय का मुख्य मार्ग अत्यंत दयनीय एवं नारकीय स्थिति में पाया गया। स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता कीचड़, दलदल और जलभराव से पूरी तरह अटा पड़ा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बच्चों के लिए विद्यालय तक सुरक्षित पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहाल छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक एवं अन्य स्टाफ भी मुख्य मार्ग के बजाय बराबर स्थित प्लॉटों से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं।
स्कूल अंदर से एकदम सही और व्यवस्थित रूप से अच्छा है
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी की निकासी के लिए पूर्व में उपलब्ध रास्ते को आगे की ओर अवरुद्ध कर दिया गया है, जिसके कारण जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार पानी की निकासी का उचित प्रबंध न होने से विद्यालय के मुख्य मार्ग की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
80 वर्ष की आजादी के बाद भी बच्चों को सुरक्षित स्कूल मार्ग उपलब्ध नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण : प्रवीन वार्ष्णेय
एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने विद्यालय की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश को आजाद हुए लगभग 80 वर्ष और भारतीय संविधान लागू हुए 76 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी अनेक स्थानों पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक शिक्षा के साथ-साथ विद्यालय तक पहुंचने की मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों और भवनों तक सीमित नहीं है। जब बच्चे सुरक्षित रूप से विद्यालय तक पहुंच ही नहीं सकते, तब शिक्षा के अधिकार की वास्तविक भावना अधूरी रह जाती है।
राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि गांव की राजनीति और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सबसे पहले बच्चों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसी भी गांव का भविष्य उसके बच्चों से जुड़ा होता है और बच्चों की शिक्षा एवं सुरक्षा के साथ किसी प्रकार की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जा सकती।
एसडीएम सदर राज बहादुर से मिलकर कराया गया समस्या से अवगत
विद्यालय के स्थलीय निरीक्षण के बाद एडीएचआर की टीम ने सबसे पहले उपजिलाधिकारी सदर राज बहादुर से मुलाकात कर विद्यालय की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। टीम ने बताया कि समस्या का स्थायी समाधान केवल अस्थायी सफाई या मिट्टी डालने से संभव नहीं है।

एडीएचआर ने मांग की कि उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम द्वारा संबंधित चकरोड की विधिवत पैमाइश कराई जाए। इसके पश्चात विकास खण्ड स्तर से आवश्यक कार्रवाई करते हुए मार्ग को सुचारु कराया जाए तथा जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए पानी निकासी हेतु उचित नाली अथवा निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।
राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि जब तक राजस्व विभाग द्वारा वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए चकरोड की नापतौल नहीं कराई जाती और प्रशासनिक स्तर पर पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक इस गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है।
खण्ड विकास कार्यालय मुरसान पहुंची एडीएचआर टीम
इसके उपरांत एडीएचआर की टीम विकास खण्ड मुरसान पहुंची और संबंधित अधिकारियों से भी इस गंभीर समस्या के संबंध में वार्ता की। टीम ने अधिकारियों के समक्ष विद्यालय तक पहुंचने वाले बच्चों और शिक्षकों की कठिनाइयों को विस्तार से रखा।
बताया गया कि खण्ड विकास अधिकारी, मुरसान द्वारा भी उपजिलाधिकारी सदर को चकरोड की पैमाइश कराए जाने के संबंध में पत्र लिखा गया है, जिससे स्पष्ट है कि समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक एवं विभागीय स्तर पर कार्रवाई की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
स्कूलों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए अभियान के रूप में कार्य कर रहा है एडीएचआर
राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि एडीएचआर जनपद में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए एक अभियान के रूप में कार्य कर रहा है। संगठन का उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि संबंधित विभागों और प्रशासन के सहयोग से उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित कराना है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण, बेहतर भवन, शुद्ध पेयजल, शौचालय, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा सुरक्षित आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
प्रवीन वार्ष्णेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एडीएचआर तब तक शांत नहीं बैठेगा, जब तक उच्च प्राथमिक विद्यालय मथु व जनपद के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों की इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता। यदि संबंधित विभागों द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था के लिए आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष या राजनीति का विषय नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। एडीएचआर की मांग है कि प्रशासन इस प्रकरण को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए तत्काल स्थलीय जांच, चकरोड की पैमाइश और पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि नौनिहाल बच्चों को कीचड़ और दलदल से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके।
एडीएचआर का स्पष्ट संदेश है
“बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। स्कूल तक सुरक्षित रास्ता प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।”
आज के स्थलीय भ्रमण मे रवि गुप्ता, बाल प्रकाश वार्ष्णेय आदि लोग उपस्थित रहे

