चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का धरना लगातार जारी: हाउस अरेस्ट हटाने की मांग, तिलक-आजाद जयंती पर नमन, साहित्यकारों के ओजस्वी काव्य पाठ से गूंजा धरना स्थल, व्यापार फेडरेशन ने दिया समर्थन
पुलिस अधीक्षक को पत्र, अपर पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता
हाथरस। कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य को पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार हाउस अरेस्ट किए जाने के विरोध में उनके कैंप कार्यालय पर जारी धरना सोमवार को भी जारी रहा। सुबह चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर तथा अपर पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता कर पुलिस की नजरबंदी तत्काल हटाने की मांग की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि, “लोकतांत्रिक देश में किसी नागरिक को बिना किसी वैधानिक आदेश के घर में रोककर रखना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। यदि हमने कोई अपराध किया है तो विधि सम्मत कार्रवाई की जाए, अन्यथा हमारी अवैध नजरबंदी तत्काल समाप्त की जाए। शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात कहना हमारा संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर कुचला नहीं जा सकता।”
व्यापार फेडरेशन ने जताया समर्थन
धरना स्थल पर व्यापार फेडरेशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल पहुंचे और चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर हो रहे अत्याचार एवं दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को दबाना उचित नहीं है।
बाल गंगाधर तिलक एवं चंद्रशेखर आजाद को दी श्रद्धांजलि
शाम को धरना स्थल पर ब्रज कला केंद्र एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर नमन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कांग्रेसी जयशंकर पाराशर ने की तथा संचालन कवि दीपक रफी ने किया।
कवियों ने ओजस्वी काव्य पाठ से भरा जोश
वरिष्ठ आशु कवि अनिल बौहर एवं श्याम बाबू चिंतन ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि,
“जो सत्ता से सच कहने का साहस रखते हैं, इतिहास उन्हीं के संघर्ष को याद रखता है। छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, कलम और जनशक्ति अंततः अन्याय पर विजय प्राप्त करेगी।”
कवि गाफिल स्वामी एवं वासुदेव उपाध्याय ने अपने काव्य पाठ में कहा कि,
“जेलों और नजरबंदियों से विचारों को कैद नहीं किया जा सकता। जब-जब अन्याय बढ़ा है, तब-तब जनआंदोलन और साहित्य ने मिलकर परिवर्तन की मशाल जलाई है।”
वरिष्ठ साहित्यकार रोशनलाल वर्मा एवं प्रभुदयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि,
“लोकतंत्र में सत्ता की असली ताकत जनता का विश्वास है, भय नहीं। संविधान की रक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए संघर्ष करने वालों के साथ समाज का हर वर्ग खड़ा रहेगा।”
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में पंडित ऋषि कुमार कौशिक, हरिशंकर वर्मा, गिरिराज सिंह गहलोत, रचित शर्मा, मोहम्मद तौसीफ पचौरी, संतोष उपाध्याय, पीयूष अग्निहोत्री, राजू कुमार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समापन:
धरना स्थल पर उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए हाउस अरेस्ट समाप्त नहीं किया जाता और छात्रों के साथ हो रहे अन्याय पर सरकार जवाब नहीं देती, तब तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।

