सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्ति हेतु आरटीई एक्ट में संशोधन की माँग ,राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सांसद को सौंपा ज्ञापन
हाथरस । अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, हाथरस ने गुरुवार को सांसद जन संवाद कार्यालय, हाथरस पर मा. सांसद अनूप प्रधान जी को ज्ञापन सौंपकर टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराने तथा इसके लिए आर.टी.ई. एक्ट में आवश्यक संशोधन करने की माँग की।

जिलाध्यक्ष रविकांत मिश्र ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बाद में निर्धारित पात्रता मानदण्डों को भूतलक्षी प्रभाव से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि ये शिक्षक वर्षों से शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
जिला महामंत्री डॉ. संजय गौतम ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद देश एवं प्रदेश के उन लाखों शिक्षकों में चिंता व्याप्त है, जिनकी नियुक्ति टीईटी लागू होने से पूर्व तत्कालीन नियमों एवं निर्धारित योग्यताओं के आधार पर विधिवत हुई थी। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद जी से अनुरोध किया कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा-अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाने हेतु भारत सरकार के समक्ष प्रभावी पहल करें।
जिला कोषाध्यक्ष बृजेश शर्मा ने बताया कि यह अभियान देशभर में चलाया जा रहा है और विभिन्न जिलों में सांसदों को ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेगी।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रविकांत मिश्र, जिला महामंत्री डॉ. संजय गौतम, जिला कोषाध्यक्ष बृजेश शर्मा, जिला मंत्री राजेंद्र लवानियां, जिला प्रचार मंत्री धर्मेंद्र उपाध्याय, जिला सह – मीडिया प्रभारी आशुतोष अग्निहोत्री, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज शर्मा, अंकित चौहान, तौफीक आलम, ब्लॉक महामंत्री ब्रजेन्द्र कुमार, दया शंकर, ब्लॉक संगठन मंत्री नगेंद्र पचौरी, संजीव कुमार, मनीष दीक्षित सहित संगठन के जिला व ब्लॉक इकाइयों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

