हाईवे किनारे अवैध कॉलोनियों पर डीएम का एक्शन, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई ,भूखंड खरीदने से पहले सभी दस्तावेज जांच करने की डीएम ने की अपील
हाथरस। आगरा-अलीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हतीसा बाईपास से नगला भूस कट तक विकसित की जा रही कॉलोनियों का जिलाधिकारी ’अतुल वत्स’ ने शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों एवं नियमों का पालन न पाए जाने पर उन्होंने संबंधित कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी करने तथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।निरीक्षण में पाया गया कि कई कॉलोनियों के मुख्य द्वार पर स्वीकृत मानचित्र, लेआउट तथा आवश्यक अनुमतियों और अभिलेखों का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया गया है, जिससे आमजन के गुमराह होने की आशंका है। इस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी एवं विनियमित क्षेत्र के अधिकारियों को तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई कॉलोनी बिना स्वीकृत लेआउट के विकसित की जा रही है अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रवेश मार्ग के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) या सक्षम प्राधिकारी की वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) उपलब्ध नहीं है, तो उसके विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई करते हुए आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी।उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की जीवनभर की पूंजी की सुरक्षा प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति को भ्रामक जानकारी देकर या नियमों का उल्लंघन कर भूखंड बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में दोषी कॉलोनाइजरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में कॉलोनियों के लेआउट स्वीकृत करने का अधिकार केवल ’जिला पंचायत क्षेत्र’ अथवा ’विनियमित क्षेत्र (नियत प्राधिकारी कार्यालय)’ को ही प्राप्त है। किसी भी कॉलोनी का विकास शुरू करने से पहले कॉलोनाइजर को सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत लेआउट एवं मानचित्र प्राप्त करना अनिवार्य है।उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक कॉलोनाइजर कॉलोनी स्थल पर स्वीकृत लेआउट, स्वीकृत मानचित्र संख्या तथा सड़क, विद्युत, पेयजल, सीवर एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करे, ताकि भूखंड खरीदने वाले लोगों को सही जानकारी मिल सके।अंत में जिलाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि किसी भी कॉलोनी में भूखंड खरीदने से पहले उसका स्वीकृत लेआउट, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों का भलीभांति सत्यापन अवश्य करें, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

