राजस्व एवं भूमि विवाद संबंधी पुनर्जीवित शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही में तय होगी जिम्मेदारी
हाथरस। आईजीआरएस पोर्टल पर विगत एक वर्ष में प्राप्त राजस्व एवं भूमि विवाद संबंधी शिकायतों की शासन स्तर पर समीक्षा के उपरांत पुनर्जीवित किए गए प्रकरणों के गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी अतुल वत्स ने शनिवार को तहसील सभागार हाथरस एवं तहसील सभागार सादाबाद में राजस्व अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।बैठक में जिलाधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत आईजीआरएस पोर्टल पर पूर्व में निस्तारित किए गए ऐसे प्रकरण, जिनका और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान संभव है, उन्हें पुनर्जीवित कर पुनः परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए तथा जहां न्यायालय में वाद दायर किए जाने की आवश्यकता हो, वहां तत्काल विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए प्रकरण का स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए।समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न भूमि विवाद संबंधी शिकायतों पर अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत निस्तारण आख्या का बिंदुवार परीक्षण किया। निस्तारण की गुणवत्ता संतोषजनक न पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि केवल औपचारिक निस्तारण स्वीकार्य नहीं होगा। शिकायत का ऐसा समाधान किया जाए कि भविष्य में वही प्रकरण पुनः आईजीआरएस अथवा अन्य किसी माध्यम से न आए।उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत के स्थलीय निरीक्षण के समय शिकायतकर्ता एवं प्रतिपक्ष दोनों की मौके पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा निरीक्षण के फोटोग्राफ अनिवार्य रूप से निस्तारण आख्या के साथ संलग्न किए जाएं। आख्या में शिकायत प्राप्त होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक की गई समस्त कार्यवाही का क्रमवार एवं बिंदुवार विवरण अंकित किया जाए, ताकि समाधान की गुणवत्ता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो सके।जिलाधिकारी ने कहा कि यदि मामला चकरोड पर अवैध कब्जे से संबंधित है तो नियमानुसार पैमाइश कराकर कब्जा हटाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। यदि मामला निजी कृषि भूमि से संबंधित है तो आवश्यकतानुसार संबंधित धाराओं में वाद दायर कराकर विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए पैमाइश एवं सीमांकन कराया जाए। किसी भी स्तर पर खानापूर्ति या औपचारिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा कि निस्तारित शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि निस्तारण में क्या कमियां रहीं और क्या वास्तव में शिकायत का समाधान हुआ। प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है, जिससे नागरिकों को बार-बार एक ही समस्या के लिए शिकायत न करनी पड़े। जिलाधिकारी ने सभी राजस्व अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण जिम्मेदारी, पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता के साथ करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।बैठक में अपर जिलाधिकारी वि0/रा0, संबंधित उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

