एडीएचआर की पारिवारिक उत्सवों पर रक्तदान मुहिम से प्रेरित होकर बेटे के जन्मदिन पर हर वर्ष रक्तदान करते हैं माता-पिता
“जन्मदिन मनाइए, खुशियां बांटिए और रक्तदान कर किसी जरूरतमंद को जीवनदान भी दीजिए।”
हाथरस। समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान देने के उद्देश्य से एडीएचआर (एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स) द्वारा चलाए जा रहे रक्तदान जागरूकता अभियान का सकारात्मक प्रभाव लगातार देखने को मिल रहा है। इसी मुहिम से प्रेरित होकर बागला डिग्री कॉलेज के कॉमर्स विभाग के प्रोफेसर राजेश शर्मा एवं उनकी पत्नी पूजा शर्मा अपने पुत्र आयुष्मान शर्मा के जन्मदिन के अवसर पर प्रत्येक वर्ष रक्तदान कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
दंपति का मानना है कि जन्मदिन जैसे खुशी के अवसर को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने के संकल्प के साथ मनाया जाना चाहिए। रक्तदान के माध्यम से वे रक्त की कमी से जूझ रहे मरीजों को जीवनदान देने का प्रयास करते हैं और समाज को भी इस नेक कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रोफेसर राजेश शर्मा ने कहा कि एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय द्वारा समाज में रक्तदान के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार किया गया है। एडीएचआर की रक्तदान मुहिम लोगों को अपने हंसी-खुशी के पलों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की प्रेरणा दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि जन्मदिन, शादी की सालगिरह और अन्य पारिवारिक अवसरों पर रक्तदान किया जाए तो यह उत्सव किसी जरूरतमंद के लिए जीवन का सबसे बड़ा उपहार बन सकता है।
एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि संस्था ने शुरू से ही समाज के लोगों से अपील की है कि वे अपने पारिवारिक उत्सवों, शादी की वर्षगांठ, जन्मदिन एवं अन्य खुशी के अवसरों पर रक्तदान कर दूसरों को जीवनदान देने का संकल्प लें।उन्होंने कहा कि “अपनी खुशियों को तभी वास्तविक अर्थ मिलता है, जब उनसे किसी दूसरे के जीवन में भी खुशियां और उम्मीद पैदा हों।” रक्तदान न केवल मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
एडीएचआर की इस पहल से प्रेरित होकर राजेश शर्मा और पूजा शर्मा द्वारा अपने बेटे के जन्मदिन पर रक्तदान करने की परंपरा निश्चित रूप से समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है

