Breaking News
उद्योगपति कौशल किशोर वर्मन के जन्मोत्सव पर सजी काव्य की महफिल,लेबर कॉलोनी स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कॉलेज हुआ भव्य आयोजन

हाथरस। सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कॉलेज, लेबर कॉलोनी, हाथरस में उद्योगपति कौशल किशोर वर्मन जी के जन्मोत्सव के अवसर पर काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें नगर के साहित्यकारों, कवियों, वैद्यों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। विभिन्न रसों और सामाजिक विषयों पर प्रस्तुत रचनाओं ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं।
गोष्ठी में वैद्य डॉ. उपेंद्र झा, वासुदेव उपाध्याय, कवि दीपक रफी, हास्य कवि पंडित हाथरसी, वैद्य मोहन बृजेश रावत, राजेश कुमार शर्मा आचार्य, डॉ. रोहिताश पाराशर, मनोज कुमार शर्मा आचार्य, डॉ. अनुपम भारद्वाज तथा कवि प्रभु दयाल दीक्षित ने काव्य पाठ किया।
डॉ. रोहिताश पाराशर ने वीर रस के साथ संघ और धर्मांतरण जैसे सामाजिक विषयों पर रचनाएं सुनाईं। दीपक रफी ने “राम का जो करेगा भजन” गीत और “उसकी मिट जाए दिल की तपन” कविता प्रस्तुत की। डॉ. अनुपम भारद्वाज ने भगवान शिव द्वारा कंठ में गरल धारण करने के प्रसंग को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया, जबकि प्रभु दयाल दीक्षित ने अपने दोहों से श्रोताओं को प्रभावित किया।
डॉ. उपेंद्र झा ने “निगाहों में बचपन समाया रहेगा” मुक्तक और “बड़े ही प्रेम से मिलिए अगर इंसान मिल जाए” रचना सुनाई। श्रृंगार रस की कविता “कैसे मैं तुझे कह दूं” ने भी खूब प्रशंसा प्राप्त की।


प्रधानाचार्य लोकेंद्र नाथ शर्मा ने “मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर” गीत प्रस्तुत किया। राजेश कुमार शर्मा ने तवे से विवाद पर आधारित हास्य कविता सुनाई, वहीं मनोज कुमार शर्मा ने ट्रेन की गति पर आधारित हास्य रचना से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वैद्य मोहन बृजेश रावत ने “मैं सीमा पर जाऊंगा” वीर रस की कविता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई।
विद्यालय के प्रबंधक मनोज अग्निहोत्री ने वर्तमान और पुराने समय के कवियों की रचनाशैली एवं सामाजिक भूमिका का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने बेटियों के संघर्ष और परिवार की बदलती जिम्मेदारियों को रेखांकित करती कविता “जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो ऑटो रिक्शा तक चलाने लगी बेटियां” भी सुनाई।
कार्यक्रम में विद्यालय अध्यक्ष पुरुषोत्तम राठी सहित विद्यालय परिवार के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। काव्य गोष्ठी में भक्ति, वीर, हास्य, श्रृंगार और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी प्रस्तुतियों ने साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया।

Unknown's avatar

आशीष सेंगर

 aashishsengar@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page