साहित्य की साधना और अध्यात्म की आराधना से ही समाज में संस्कारों का सूर्य उदित होता है : चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य”
हाथरस। आगरा रोड स्थित ठाकुर मदन मोहन जी मंदिर परिसर में वरिष्ठ साहित्यकार वासुदेव उपाध्याय के संयोजन में एक भव्य आध्यात्मिक-साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता हाथरस के वरिष्ठ विद्वान पंडित संतोष मुखिया ने की तथा संचालन राकेश कुमार रावत ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने मां शारदे के छवि चित्र पर पीत वस्त्र उड़ाकर एवं पुष्प अर्पित कर नमन किया इसके उपरांत बाबा देवी सिंह निडर द्वारा माँ शारदा की वंदना—
“वीणा वादिनी वर दे माता, ज्ञान ज्योति मन में भर दे।

शब्द-शब्द में सत्य बसाकर, जीवन को सुंदर कर दे।”
—के साथ शुभारंभ किया गया।
इसके उपरांत कवि रामजीलाल शिक्षक ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“भक्ति की राह चलो साथियों, मन का अंधियारा मिट जाएगा,
राम नाम की ज्योति जले तो जीवन भी उजियारा हो जाएगा।”
वरिष्ठ साहित्यकार प्रभु दयाल दीक्षित ‘प्रभु’ ने सुनाया—
“जहाँ प्रेम की गंगा बहती है, वहीं प्रभु का वास होता है,
जिस हृदय में करुणा बसती है, वहीं सच्चा प्रकाश होता है।”
कवि श्याम बाबू चिंतन ने अपनी भावपूर्ण रचना में कहा—
“शब्द तभी सार्थक होते हैं, जब जनमन का हित साधें,
कविता वही अमर कहलाती, जो मानवता का पथ बाँधे।”
भगवती प्रसाद शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य मनुष्य को संस्कार, संवेदना और सदाचार का मार्ग दिखाता है तथा आध्यात्मिकता जीवन को उद्देश्य प्रदान करती है।
मुख्य अतिथि चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने अपने संबोधन में कहा—
“जब साहित्य में अध्यात्म का आलोक जुड़ता है, तब शब्द केवल कविता नहीं रहते, बल्कि समाज परिवर्तन का संकल्प बन जाते हैं। हमारी संस्कृति, हमारी भाषा और हमारी सनातन परंपराएँ ही राष्ट्र की आत्मा हैं। साहित्यकार समाज का वह प्रहरी है जो कलम से संस्कारों की मशाल जलाकर नई पीढ़ी को दिशा देता है।”
कार्यक्रम संयोजक वासुदेव उपाध्याय ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा
“सत्संग, साहित्य और संस्कारों की यह पावन धारा बहती रहे,
मानवता के इस उपवन में प्रेम और सद्भावना महकती रहे।”
अध्यक्षता कर रहे पंडित संतोष मुखिया ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और आध्यात्मिक चेतना उसके जीवन मूल्यों की आधारशिला है। ऐसे आयोजन समाज में नैतिकता, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर बाबूराम शर्मा, चौधरी अनिल कुमार, ओम प्रकाश मुखिया, पंडित विष्णु शास्त्री, पप्पू पाठक, एम.पी. गौतम, सुरेश चंद तिवारी, हरि शंकर वर्मा, पंडित नित्यानंद शर्मा, जमुना प्रसाद शर्मा, वेद प्रकाश शास्त्री सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

