“तुलसी साहिब की वाणी से आज भी आलोकित है संसार, हाथरस की पावन धरा है संत परंपरा का श्रृंगार”— चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ,तुलसी साहिब वार्षिकोत्सव के कवि सम्मेलन में बरसा काव्य अमृत
हाथरस। परम गुरु तुलसी साहिब आश्रम में आयोजित 183वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से भक्ति, अध्यात्म और साहित्य की अनुपम सरिता प्रवाहित की। देर रात्रि तक चले कवि सम्मेलन में गुरु महिमा, राष्ट्र प्रेम, सामाजिक सरोकार एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित काव्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
आश्रम के गद्दीधर परम पूज्य श्री महंत गुरु लोचन दास जी महाराज की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सदर राज बहादुर सिंह, विशिष्ट अतिथि जीएसटी विभाग के सहायक आयुक्त आर.के. सिंह, समाजसेवी प्रद्युम्न गुप्ता एवं ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां शारदा एवं संत तुलसी साहिब के छवि चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
कार्यक्रम के शुभारम्भ उपरांत श्री महंत गुरु लोचन दास जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन करने वाले सभी अतिथियों को पीत वस्त्र ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद स्वरूप सम्मानित किया। अपने आशीष वचनों में उन्होंने कहा कि संत तुलसी साहिब का साहित्य मानवता, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य खजाना है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
स्वागत उद्बोधन में साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि संत तुलसी साहिब की वाणी केवल एक आध्यात्मिक संदेश नहीं बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। उन्होंने कहा कि हाथरस की यह भूमि संत परंपरा, साहित्य और अध्यात्म की त्रिवेणी है, जिस पर सम्पूर्ण जनपद को गर्व है।

कवि सम्मेलन का संचालन आशुकवि अनिल बौहरे ने किया। उन्होंने अपनी पंक्तियों से वातावरण को भक्तिमय बनाते हुए कहा—
“घट रामायण ने किया हाथरस जग प्रसिद्ध,
परम गुरु तुलसी साहिब थे महाकवि सिद्ध।”
वरिष्ठ कवयित्री मनु दीक्षित ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“माता सरस्वती कृपया कवियों को ऐसा वर दो,
तुलसी साहिब की कृपा हम कवियों पर कर दो।”
ग़ाफ़िल स्वामी इगलास ने अपनी रचना में कहा—
“तुलसी साहिब ने किए पावन कर्म महान,
घट रामायण लिख किया जन-जन का कल्याण।”
चेतन उपाध्याय लाढ़पुर ने पढ़ा—
“धन्य-धन्य है इहि निज धरा हाथरस,
तुलसी साहिब बरसाया काव्य रस।”
वरिष्ठ कवयित्री मीरा दीक्षित ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा—
“गुरु से मिलता जिस शिष्य को ज्ञान,
समाज में पाता है वही शिष्य सम्मान।”
गीतकार नितिन मिश्रा ने अपनी लोकप्रिय रचना प्रस्तुत की—
“मेरी राम-राम जी,
सबको राम-राम जी।”
कवि हिमांशु शंकर चंदौसी ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। उन्होंने कहा—
“संतों की वाणी अमृत बनकर जन-जन तक पहुंच जाती है,
जिस धरती पर संत बसते हैं वह धरती तीर्थ कहलाती है।”
जनाब रासिद राहत मुरादाबादी ने अपनी ग़ज़ल से कवि सम्मेलन को नई ऊंचाई प्रदान करते हुए कहा—
“मोहब्बतों का दिया दिल में जलाए रखना,
नफरतों के दौर में इंसां बने रहना।”
मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी राज बहादुर सिंह ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा—
“सेवा, समर्पण और संस्कार जीवन का आधार बने,
ऐसा भारत हो अपना जिसमें मानवता साकार बने।”
साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने आश्रम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा—
“जहां तुलसी साहिब की वाणी का दिव्य प्रकाश है,
वहीं मानवता, प्रेम और सत्य का वास है।
घट-घट में राम का संदेश जहां से मिलता है,
वह तुलसी साहिब आश्रम हम सबकी आस्था का विश्वास है।”
कवि सम्मेलन की सफल व्यवस्था में पंडित मुकेश शर्मा का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर पंडित ऋषि कौशिक, पंडित अविनाश पचौरी, डॉ. अनार सिंह, विजय गुप्ता, जीवन लाल शर्मा, नवीन वार्ष्णेय, दीप्ति वार्ष्णेय, विष्णु कुमार, प्रशांत कुमार, पूजा वर्मा, गोलू, कपिल नरूला, संतोष उपाध्याय, ललित कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे हजारों श्रद्धालुओं एवं संत तुलसी साहिब के भक्तों ने कवि सम्मेलन का भरपूर आनंद लिया। अंत में व्यवस्थापक पंडित मुकेश शर्मा ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

