शताब्दी वर्ष का हर्ष, अद्भुत दिखा संचलन का दृश्य ,आरएसएस के स्वयंसेवकों ने विजयादशमी पर्व पर महानगर में 36 स्थानों से निकाला पथ संचलन
= संचलन की उतारी आरती, जयघोष हुआ जय मां भारती
= कदम से कदमताल करते हुए स्वयंसेवकों का अनुशासन चर्चा का रहा विषय
अलीगढ़ : विजय का पर्व, हर दिल में शताब्दी वर्ष का गर्व। कदमताल करते हुए निकले आरएसएस के स्वयंसेवकों में कुछ इसी तरह का स्वाभिमान जगा हुआ था। संघ अपनी 100 की यात्रा पूर्ण कर आगे बढ़ चला तो स्वयंसेवकों ने भी शताब्दी वर्ष के अंतिम कार्यक्रम में अपना अद्वितीय योगदान दिया। महानगर के 36 स्थानों से निकले पथ संचलन में स्वयंसेवकों ने अनुशासन, धैर्य और देशभक्ति की अनूठी मिसाल पेश की। पूर्ण गणवेश में संघ कार्यकर्ताओं के जयघोष की हर तरफ गूंज थी। माहौल ऐसा बना कि पूरा महानगर संघमय हो गया। शहर की संकरी गलियाँ हों या फिर बड़े चौराहे हर तरफ स्वयंसेवकों की कदमताल थी। संचलन का फूलों की बारिश से अभिनंदन हुआ तो घी के दीपक की आरती से वंदन। ऐसा लग रहा था मानों माँ भारती स्वयं अपने पुत्रों को विश्व गुरू का आशीर्वाद दे रही हों। तोरणद्वारों पर जब स्वागत हुआ तो भारत माता और वन्देमातरम का जयघोष गूंज उठा।

मंगलवार को पूरे महानगर में कुछ इसी तरह का दृश्य था।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतिम कार्यक्रम को लेकर विजयादशमी पर्व पर संघ के स्वयंसेवकों में गजब का उत्साह था। हालांकि, इसकी तैयारी विगत एक महीने से चल रही थी। पर, विजयादशमी पर्व पर विहंगम दृश्य जो दिखा वो अद्भुत था। संघ के छह उत्सवों में प्रमुख उत्सव विजयादशमी पर्व भी है। महानगर के 36 स्थानों पर हुए कार्यक्रम में संयुक्त रूप से संघ के बंधुओं का यही विचार था कि शताब्दी वर्ष बीत गया मगर हमें रुकना नहीं है। मां भारती की सेवा के लिए सतत चलना और आगे बढ़ना ही संघ है। आरएसएस के विभाग प्रचारक गोविंद ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक कभी विश्राम नहीं लेते। वह भारत माता की सेवा में रत रहते हैं। इसलिए शताब्दी वर्ष के बाद हम सभी फिर देश की सेवा में जुट जाएं। लक्ष्य बड़ा है इसलिए शाखायें नियमति करें। प्रत्येक परिवार से स्वयंसेवक हो इसका लक्ष्य हमें निर्धारित करना है। गोविंद ने कहा कि संघ जब तय कर लेता है तो वह करके मानता है। विभाग कार्यवाह योगेश आर्य ने कहा कि व्यक्ति निर्माण में संघ की प्रमुख भूमिका है। 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना हुई, तभी से संघ व्यक्ति निर्माण के साथ राष्ट्र निर्माण में जुट गया। वर्तमान में विश्वभर में लाखों स्वयंसेवक मां भारती की सेवा कर रहे हैं। गोंडा मार्ग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आरएसएस के विभाग प्रचार प्रमुख भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि संघ देशभक्ति की पाठशाला है। यहां जाने पर बालक देशभक्त बनता है।इसके बीच अन्य वक्ताओं धीरज सिंह, रतन कुमार मित्र, राजनारायण सिंह, डॉ सुनील चौहान, रामजी महानगर प्रचारक, प्रमोद भारद्वाज, आनंद कुमार, दयाल शर्मा, हिमांशु शर्मा, जगदीश पाठक, कृष्ण कुमार, जय प्रकाश सारस्वत, मनवीर सिंह, टीकम सिंह, मधुकर आर्य, मुरारी लाल, ललित कुमार, हुकुम सिंह, संदीप बैट्री, काली चरण, इंद्रमणि पाठक, गोपाल परख आदि ने विजयदशमी पर विचार रखे, पंच परिवर्तन पर जोर दिया।
इससे पूर्व महानगर में सुबह 7.30 बजे के करीब अधिकांश स्थानों से पथ संचलन प्रारंभ हुआ। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में घोष के साथ कदमताल करते हुए निकले। घोष पर सेना के जवानों की तरह स्वयंसेवकों के कदम मिल रहे थे। उनका अनुशासन देखते ही बन रहा था। पथ संचलन के मार्ग पर नगर वासियों ने भव्य स्वागत किया। तोरणद्वारों पर फूलों की बारिश की। नौरंगाबाद में घी के दीपक से संचलन में शामिल स्वयंसेवकों की आरती की गई। माताओं ने स्वागत गीत गाए। फूलों की बारिश की। यह दृश्य अद्भुत और अविस्मरणीय था।
- घोष- बैंड के शिक्षक प्रीतम सिंह, रोहित केला, दिनेश आचार्य, प्रणव उपाध्याय, दक्ष शर्मा, उमा शंकर आदि ने धुन पर घोष की व्यवस्था की ।

