हाथरस जिला प्रचारक जयकिशोर मारपीट प्रकरण में अदालत सख्त, सभी आरोपियों को 11 जून तक आत्मसमर्पण के आदेश
हाथरस। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक जयकिशोर से हुई बहुचर्चित मारपीट के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी आरोपियों को आत्मसमर्पण करने को कहा है है। माननीय न्यायालय ने अभियुक्तों के विरुद्ध जिला प्रचारक को जान से मारने का प्रयास, डकैती, चोरी की संपत्ति धारित करने एवं स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने जैसी गंभीर धाराओं में मामला बनता मानते हुए 11 जून 2026 तक न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि 1 फरवरी 2026 को जिला प्रचारक जयकिशोर नवल नगर स्थित संघ कार्यालय जा रहे थे। इसी दौरान नवल नगर के प्रवेश द्वार पर वाहन हटाने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद के बाद कुछ लोगों ने जयकिशोर पर लोहे की रॉड, डंडों आदि से हमला कर दिया और उन्हें गंभीर अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों एवं संघ कार्यकर्ताओं ने उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर आगरा रेफर कर दिया गया था।
इस मामले में आरएसएस के सह विभाग कार्यवाह अजय कुलश्रेष्ठ द्वारा जानलेवा हमला और लूटपाट सहित विभिन्न धाराओं में पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टीम गठित कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
16 फरवरी को आरोपियों को जमानत मिल गई थी, जिसके खिलाफ वादी पक्ष के अधिवक्ता ने जिला एव सत्र न्यायालय में निगरानी प्रस्तुत की। 25 फरवरी को निगरानी न्यायालय ने अवर न्यायालय के आदेश में संशोधन करते हुए धारा 109(1) को 110 भा.न्या.सं.में परिवर्तित करने संबंधी आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही धारा 311 को 304(2) में परिवर्तित करने का आदेश भी निरस्त कर दिया गया एवँ श्रीमान सत्र न्यायाधीश महोदय द्वारा श्रीमान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस को निर्देशित किया कि वे धारा 109(1) एवं 311 के संबंध में पुनः रिमांड आदेश पारित करें। इसके अनुपालन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हाथरस ने 23 मई को आदेश जारी करते हुए आरोपी सतीश उर्फ डब्बू, तरुण, देव और सचिन को निर्देश दिया कि वे 11 जून 2026 तक न्यायालय में आत्मसमर्पण करें।
अदालत ने माना कि धारा 190, 191(3), 311, 317(3), 109(1) एवं 117(2) भा.न्या.सं. के अंतर्गत न्यायिक अभिरक्षा योग्य मामला बनता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण के बाद आरोपियों को धारा 232(ए) के अंतर्गत न्यायिक अभिरक्षा में लिया जा सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 11 जून को निर्धारित की गई है। वादी की तरफ से पैरवी राजपाल सिंह दिसावर पूर्व डीजीसी द्वारा की गई।

