ठा. कन्हैयालाल जी मंदिर में चल रही कथा में बोले व्यासाचार्य-भक्तों के लिये रणछोड़ कहलाये
- कथा में कृष्ण-बलराम का मथुरा आगमन, कृष्ण-रुक्मणी विवाह आदि का हुआ वर्णन
- रामेश्वर व विकास ने लिया व्यासाचार्य से आशीर्वाद
- मंदिर कमेटी ने किया आगंतुक अतिथियों का स्वागत
‘परित्राणाम साधूनां विनाशाय च दुष्कृतम्’ अर्थात साधुओं को बचाने और दुष्टों के संहार के लिए मैं आता हूँ।
यह उद्गार श्री हरि सुरेशाचार्य जी महाराज ने बतौर व्यासपीठ से रुई की मण्डी स्थित ठा. कन्हैयालाल जी महाराज में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन व्यक्त किये। इसके अलावा श्रीमद् भागवत सप्ताह के छठे दिन कथा व्यास श्री हरि सुरेशाचार्य जी महाराज ने कथा में बलराम श्री कृष्ण का मथुरा आगमन, कंस वध, रुक्मणी-कृष्ण विवाह, एवं रणछोड़ प्रसंग का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया गया। कथा श्रवण में खास तौर से उपस्थित हुए ब्लॉक प्रमुख मुरसान रामेश्वर उपाध्याय व डॉ विकास शर्मा फोकस अल्ट्रासाउंड ने महाराज जी का माला व परका पहनाकर स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी ने सभी को ठा. कन्हैया लाल का छवि चित्र देकर सम्मानित किया। मंदिर कमेटी की ओर से अध्यक्ष राजकुमार कोठीवाल के अलावा रमेशचंद्र शर्मा “ब्रह्मचारी”, मंदिर सेवायत पं.चेतन मिश्र, बौ. देवेश कौशिक जी, पं. राजा “रंगीला”, कन्हैयालाल घी वाले, आलोक वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, सौरभ मोबाइल वाले, पूर्व सभासद पवन गुप्ता तेल वाले, ठा.पवन पौरुष, बांके बिहारी वर्मा, दीपक वर्मा, एडवोकेट संजय दीक्षित, संजीव वर्मा के अलावा भारी संख्या में महिलाएं शक्ति एवं भक्तगण उपस्थित थे।

