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दानदाताओं के नाम से स्थापित अस्पतालों की मूल पहचान एवं उद्देश्य को सुरक्षित रखा जाए ,मलखान सिंह इंटर कॉलेज, ठूलई पूर्व अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र

हाथरस। हाथरस जनपद केवल व्यापार और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि परोपकार एवं जनसेवा की समृद्ध परंपरा के लिए भी जाना जाता है। नगर के अनेक दानवीर परिवारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए भूमि दान कर विद्यालयों, चिकित्सालयों एवं अन्य जनोपयोगी संस्थानों की स्थापना कराई तथा उनके संचालन हेतु आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं। लेकिन दानदाताओं के नाम से स्थापित अस्पतालों की मूल पहचान एवं उद्देश्य को न बदलकर उन्हें सुरक्षित रखे जाने की मांग की है।


ग्राम शेखुपुर अजीत निवासी मलखान सिंह इंटर कॉलेज, ठूलई पूर्व अध्यक्ष अमर पाल सिंह ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि हाथरस में दानवीरों के नाम पर स्थापित प्रमुख चिकित्सालयों में बागला अस्पताल (बागला परिवार), सिंगारी देवी महिला चिकित्सालय (सेकसरिया परिवार), हरि आई हॉस्पिटल तथा मटरूमल धन्नालाल क्षय चिकित्सालय (लोहिया परिवार) प्रमुख हैं। समय के साथ इनमें से कई संस्थानों की मूल पहचान समाप्त होती चली गई। बागला अस्पताल का नाम बदलकर बागला संयुक्त जिला चिकित्सालय कर दिया गया। सिंगारी देवी महिला चिकित्सालय की भूमि पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कार्यालय स्थापित होने से उस अस्पताल का अस्तित्व और नाम भी समाप्त हो गया। हरि आई हॉस्पिटल भी बंद हो चुका है।
अब जानकारी मिल रही है कि मटरूमल धन्नालाल क्षय चिकित्सालय के भवन का उपयोग अन्य चिकित्सा सेवाओं एवं संयुक्त जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं के लिए किए जाने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो भविष्य में इस ऐतिहासिक चिकित्सालय की मूल पहचान भी समाप्त होने की आशंका है।
लोहिया परिवार द्वारा यह भूमि विशेष रूप से क्षय रोग (टीबी) के उपचार हेतु दान की गई थी। उस समय टीबी अत्यंत गंभीर संक्रामक रोग था और रोगियों के पृथक उपचार के लिए विशेष चिकित्सालयों की आवश्यकता होती थी। मटरूमल धन्नालाल क्षय चिकित्सालय ने वर्षों तक टीबी रोगियों के उपचार, जनजागरूकता तथा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
टीबी एक संक्रामक रोग है, इसलिए चिकित्सा विज्ञान के अनुसार टीबी रोगियों को सामान्य रोगियों से पृथक रखना आवश्यक है। इससे संक्रमण का प्रसार रुकता है, बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और बहुऔषधि-प्रतिरोधी (MDR-TB) संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकता है।
अतः शासन एवं स्वास्थ्य विभाग से अनुरोध है कि मटरूमल धन्नालाल क्षय चिकित्सालय के भवन का उपयोग केवल क्षय रोगियों के उपचार हेतु ही किया जाए। इस भवन में अन्य अस्पतालों के मरीजों अथवा स्टाफ को स्थानांतरित न किया जाए तथा दानदाता परिवार द्वारा स्थापित इस ऐतिहासिक चिकित्सालय की मूल पहचान, उद्देश्य एवं नाम को यथावत सुरक्षित रखा जाए।

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आशीष सेंगर

 aashishsengar@gmail.com

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