प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं किसान मेले में किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान
हाथरस। कृषि विज्ञान केन्द्र, रति का नगला (हसायन) में गुरुवार को प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम योजनांतर्गत किसान मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सदर विधायक श्रीमती अंजुला सिंह माहौर, सिकंद्राराऊ विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह राना, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री प्रेमसिंह कुशवाह, जिला विकास अधिकारी श्री पी.एन. यादव, उप कृषि निदेशक श्री सत्येन्द्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी श्री निखिल देव तिवारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, लीड बैंक मैनेजर, जिला उद्यान अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

सिकंद्राराऊ विधायक वीरेन्द्र सिंह राना ने कहा कि आजादी के समय देश में जनसंख्या कम होने के बावजूद खाद्यान्न की कमी थी, जबकि आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ अन्य देशों को भी निर्यात कर रहा है। उन्होंने किसानों से उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान, जय किसान”, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान” का नारा दिया। उन्होंने कहा कि इसी सोच के अनुरूप कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थापना की गई है, जिससे किसान वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन का लाभ लेकर आधुनिक एवं लाभकारी खेती अपना सकें।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेमसिंह कुशवाह ने किसानों को देश का अन्नदाता बताते हुए कृषि विभाग द्वारा आयोजित गोष्ठियों एवं किसान मेलों में नियमित रूप से भाग लेने तथा वैज्ञानिकों के निर्देशन में तकनीकी खेती अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किसानों को अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
अंत में उप कृषि निदेशक श्री सत्येन्द्र सिंह ने कार्यक्रम में शामिल जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप-बी) ने किया।

