श्रीराम कथा के मध्य रात्रिकालीन कवि सम्मेलन में बही काव्यरस की गंगा
हाथरस। ग्राम चमरुआ में चल रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा के मध्य रात्रिकालीन विराट कवि सम्मेलन का आयोजन ग्राम प्रधान रामसेवक रावत के मार्गदर्शन एवं सुरेश चंद शर्मा के संयोजन में संपन्न हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता संत प्रवर पंडित रामलखन मिश्र ने की, जबकि मुख्य अतिथि कांग्रेस के कोऑर्डिनेटर एवं ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ आशुकवि अनिल बोहरे ने किया।
कार्यक्रम निदेशक एवं काका स्मारक समिति के सचिव, कृषि विभाग में एडीओ डॉ. जितेंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों एवं कवियों का प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पीत वस्त्र अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत कवयित्री मीरा दीक्षित ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

सर्वप्रथम साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने अपनी काव्यमयी रचना में आयोजन का चित्रण करते हुए कहा—
“जहाँ राम कथा की गूंज से पावन हुआ संसार है,
वहीं काव्य सरिता बह रही, यह भारत की पहचान है।
चमरुआ की इस पुण्य धरा पर शब्दों का उत्सव सजा,
भक्ति, संस्कृति और साहित्य का अनुपम यह सम्मान है।”
इसके पश्चात कवि ग़ाफ़िल स्वामी ने मातृशक्ति को समर्पित रचना सुनाते हुए कहा—
“मां के चरणों में जन्नत है, मां से ही परिवार है,
मां की ममता से रोशन हर जीवन का संसार है।”
हास्य कवि पंडित हाथरसी ने व्यंग्य बाणों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और कहा—
“नेता जी के वादों जैसा मौसम भी बेईमान हुआ,
धूप निकली, बादल आए, फिर बरसात का एलान हुआ।”
ओजस्वी कवि चेतन उपाध्याय ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“जब-जब भारत मां पर कोई संकट लेकर आया है,
वीरों ने अपने लहू से इतिहास नया लिखवाया है।”
कवयित्री मीरा दीक्षित ने गीत-ग़ज़लों के माध्यम से महिलाओं का मन मोह लिया। उन्होंने कहा—
“नारी केवल श्रद्धा है, विश्वास रजत नग पग तल में,
जीवन के सुंदर समतल में पीयूष स्रोत सी बहती है।”
शाजापुर से पधारे हास्य कवि सुखबीर सिंह ‘सुक्खी’ ने अपने चुटीले अंदाज में कहा—
“घर में मेरी चलती कब है, यह सबको मालूम हुआ,
पत्नी बोली चुप हो जाओ, मेरा भी सम्मान हुआ।”
कवयित्री मनु दीक्षित ने ओज एवं संवेदनाओं से भरपूर रचनाएं प्रस्तुत करते हुए कहा—
“जो अन्याय के सम्मुख झुक जाए वह इंसान नहीं होता,
सत्य पथ पर जो अडिग रहे उसका सम्मान कम नहीं होता।”
युवा कवि यश कौशिक ने हास्य रस की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब हंसाया। उन्होंने कहा—
“मोबाइल ने ऐसा जादू आज जमाने पर कर डाला,
घर बैठे-बैठे हर रिश्ते का हालचाल ही बदल डाला।”
अंत में ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने नारी महत्व एवं वर्तमान राजनीति पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए कहा—
“नारी शक्ति का सम्मान हो, यही राष्ट्र का मान है,
जिस घर में नारी पूजित हो, वहीं सच्चा भगवान है।
राजनीति सेवा का माध्यम हो, स्वार्थ का व्यापार नहीं,
युवा जागे, राष्ट्र संभाले, इससे बढ़कर काम नहीं।”
कार्यक्रम के अंत में आशुकवि अनिल बोहरे ने अपनी चर्चित तीन शब्दों की कविताओं से श्रोताओं पर जादू बिखेरते हुए कहा—
“शब्द छोटे हैं, भाव बड़े हैं,
यही हमारे काव्य धड़े हैं।
तीन शब्द में बात कहें हम,
यही अनिल के काव्य कड़े हैं।”
कार्यक्रम को सफल एवं भव्य बनाने में देवेश रावत, लक्ष्मी रावत, योगेश रावत एवं भारती रावत का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर मनीषा शर्मा, रामदत्त शर्मा, मुकेश रावत, लक्ष्मी नारायण शर्मा, डॉ. देवेंद्र शर्मा, शशि प्रभा शर्मा, प्रतिमा शर्मा, रामगोपाल शर्मा, अरुणा शर्मा, दिव्यांश, प्रज्वल, वेदिका, राध्य सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

