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श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति का संदेश देने के लिए हुआ था– डॉ. गोपेश्वर महाराज

हाथरस। श्री कृष्ण गौशाला सेवा समिति के तत्वावधान में स्थानीय श्री कृष्ण गौशाला परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर कथा व्यास आचार्य पं. डॉ. गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ‘मनु’ महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संतों की सेवा और सत्संग मनुष्य जीवन को सफल बनाने का सर्वोत्तम साधन है। संतों के सान्निध्य से व्यक्ति के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है तथा मुक्ति के द्वार खुलते हैं।
चतुर्थ दिवस की कथा में ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद तथा भगवान की अनन्य भक्ति के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और भगवान के जयघोष से पूरा परिसर गूंज
कथा के दौरान महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया तथा कंस के अत्याचारों से प्रजा त्रस्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना की। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा की कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। वसुदेव जी नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के यहां ले गए। भगवान के जन्म प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गुंजायमान हो गया।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति का संदेश देने के लिए हुआ था। श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रत्येक परिस्थिति में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी के दर्शन किए, आरती में सहभागिता की तथा प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा के आगामी दिवसों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने का आग्रह किया।

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आशीष सेंगर

 aashishsengar@gmail.com

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