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सन्तों की सेवा से खुलते हैं मुक्ति के द्वार – डॉ. गोपेश्वर महाराज ,श्री कृष्ण गौशाला परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा तृतीय दिवस सत्संग की महिमा का वर्णन

हाथरस। श्री कृष्ण गौशाला सेवा समिति के तत्वावधान में स्थानीय श्री कृष्ण गौशाला परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर कथा व्यास आचार्य पं. डॉ. गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ‘मनु’ महाराज ने सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संतों का संग एवं महापुरुषों की सेवा मनुष्य के लिए मुक्ति के द्वार खोल देती है। उन्होंने कहा कि संतों के सान्निध्य से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, सद्बुद्धि तथा ईश्वर भक्ति का संचार होता है।

महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि पुराण भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ हैं। पुराणों के श्रवण एवं मनन से ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता है। उन्होंने बताया कि समस्त पुराणों में श्रीमद्भागवत महापुराण का विशेष महत्व है। इसके पठन-पाठन एवं श्रवण से ईश्वर की कृपा का अनुभव होता है तथा जीवन का कल्याण होता है।

कथा प्रसंग में अजामिल चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवन्नाम की महिमा इतनी महान है कि घोर पापी अजामिल भी अंतिम समय में भगवान का नाम लेने से नरकगमन से बच गया। वहीं श्री नृसिंह अवतार की कथा के माध्यम से बताया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं तथा धर्म की स्थापना के लिए समय-समय पर अवतार धारण करते हैं।

इस अवसर पर परम पूज्य वैष्णवाचार्य पं. उपेन्द्र नाथ चतुर्वेदी महाराज का सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कथा के उपरांत भव्य आरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में अरुण गर्ग, राकेश बंसल (हींग वाले), अतुल अग्रवाल, प्रदीप राजगढ़िया, श्याम अग्रवाल, दीपेश अग्रवाल सर्राफ, आनंद गोयल,श्यामसुन्दर शर्मा, गोपाल कृष्ण शर्मा अमित कुशवाहा सहित अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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आशीष सेंगर

 aashishsengar@gmail.com

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