वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए कानूनोँ की दी जानकारी
हाथरस । मीतई स्थित वृद्धाश्रम में अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत एक कार्यशाला और स्वयं सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में वृद्धजनों को उनके कानूनी अधिकारों और संबंधित प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडवोकेट गोविंद उपाध्याय ने वृद्धजनों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए विशेष कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
एडवोकेट उपाध्याय ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम 2007 का विशेष रूप से उल्लेख किया। इस अधिनियम के तहत, यदि बच्चे या वारिस बुजुर्गों की उपेक्षा करते हैं, तो उन्हें तीन माह तक की कैद हो सकती है।
एडवोकेट उपाध्याय ने आगे बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के अंतर्गत बुजुर्गों को संपत्ति की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, कर संबंधी लाभ और अन्य वित्तीय सहायता मिलती है। उन्होंने घरेलू हिंसा के मामलों में भी दंड के प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने सरकार द्वारा बुजुर्गों के सम्मान और बेहतर जीवन के लिए चलाई जा रही वृद्धा पेंशन योजनाओं तथा प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. ओमप्रकाश सारस्वत ने की। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था कानून बुजुर्गों की कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह सेवानिवृत्ति लाभ, संपत्ति नियोजन, स्वास्थ्य देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ाने में सहायक है।
जिला विधिक सेवा कार्यालय ने सभी गरीब और समाज के वंचित वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता (फ्री एडवोकेट) और न्याय व्यवस्था के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य संचालिका नीतू मिश्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया।

