जीवन के थपेड़ों को रोकने का केन्द्र है आश्रम: मोहन भागवत, जीवन दीप आश्रम का हुआ लोकार्पण
वृन्दावन(मथुरा) । जीवन दीप आश्रम वृन्दावन के लोकार्पण समारोह में बोलते हुये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहनराव भागवत ने कहा कि आश्रम केवल पेट भरने का नहीं बल्कि वास्तविक ज्ञान का केन्द्र होते है।इनसे व्यक्ति को जीवन मे इतना साहस मिलता है कि वह जीवन के थपेड़ों से लड़ने में सक्षम बनता है।उन्होंने आगे कहा कि आश्रम एक पाठशाला हैं।यहां जीवन की विद्या सिखायी जाती है।आश्रम में आने वाला पाठ पढ़ने वाला न सिर्फ अपने भौतिक शरीर को ठीक रखता है अपितु भौतिक जीवन से बाहर भी वह अग्रेसित होकर पारलौकिक जीवन की सुधार की ओर बढ़ जाता है।
मोहन भागवत जी महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी जी महाराज द्वारा वृन्दावन में नए बनाये गए जीवन दीप आश्रम के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे उन्होंने यतीन्द्रनन्द जी द्वारा भारत की बढ़ती जनसख्या के प्रश्न पर कहा कि आज मैं यहां इस बिषय पर बोलने नहीं आया हूँ फिर भी धर्म और चिकित्साविज्ञान तथा व्यवहार कहता है कि तीन संतान अवश्य होनी चाहिये ।जनसंख्या शास्त्री कहते हैं।कि तीन बच्चे के नीचे मत आओ आज दुनिया के देश प्रयास करके अपनी जन्म दर को बढ़ा रहे हैं।पचास साल बाद भी यह जनसंख्या उपयोगी बने ऐसा सबको समझाकर पॉपुलेशन पॉलिसी लानी चाहिये।मनुष्यों के कल्याण के लिये यह आवश्यक है कि उनके तीन संताने हों हांलांकि किसीअविवाहित से ये सवाल नहीं होना चाहिये फिर भी मैंने उत्तर दिया।
समारोह का शुभारंभ हनुमान चालीसा पाठ के साथ दिल्ली स्कूल के बच्चों की सुंदर।प्रस्तुति के साथ हुआ।तथा बीच मे भी विभिन्न प्रान्तों के संघ के विद्यालयों के छात्रा वास से आयी हुई बच्चियों ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लोकनृत्य की सुंदर झांकी प्रस्तुत की।
मैं बचपन से स्वयंसेवक हूँ : सन्त अवधेशानन्द
समारोह में जुनागठ अखाड़ा के पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेस्वर अवधेशानन्द गिरी जी ने कहा हमने 12 लाख नागाओं को दीक्षा दी है।हमारे मस्तक पर त्रिपुंड है अर्थात यह हमारे शैव होने का प्रतीक है।हम अंदर से शाक्त है।व्यवहार से हम वैष्णव हैं अर्थात हम सब साधु संत एक हैं।उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि सर संघ चालक और स्वयंसेवक में क्या अंतर है हमने कहा दोनो में समानता यह है कि दोनों ही स्वयंसेवक है।उन्होंने आगे कहा कि मैं भी बचपन से स्वयंसेवक हूँ।और यतीन्द्रानन्द जी भी बचपन से स्वयंसेवक हैं।
समारोह में दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि शत संकल्प के।प्रति पूर्ण निष्ठा ही संसार के किसी भी कार्य की पूर्ति में सहायक है।उन्होंने कहा हमारे अंदर अहंकार न हो।जीवन दीप आश्रम के लोकार्पण पर।उन्होंने हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
समारोह में मंच पर साधु संतों के साथ संघ के अखिल भारतीय अधिकारी इंद्रेश जी,विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश जी उपस्थित रहे।
समारोह का संचालन स्वामी पद्मानन्द गिरी जी महाराज ने किया। समारोह का समापन वंदेमातरम के साथ।हुआ।

