हाथरस। पद्मश्री काका हाथरसी द्वारा प्रारंभ की गई हास्य-व्यंग्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ब्रज कला केंद्र के तत्वावधान में आयोजित 67वें महामूर्ख सम्मेलन ने शहर में हास्य, व्यंग्य और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ समाज को आईना दिखाने वाले संदेशों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ आगरा रोड स्थित शहीद पार्क में अमर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया। उपस्थित प्रतिभागियों ने शहीदों को नमन करते हुए राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का स्मरण किया तथा प्रतीकात्मक रूप से समाज की भूलों के लिए क्षमा याचना की।
इसके पश्चात श्री राधाकृष्ण कृपा भवन सभागार में आयोजित मुख्य समारोह में ब्रज कला केंद्र, संस्कार भारती, राष्ट्रीय कवि संगम एवं काका हाथरसी स्मारक समिति के सहयोग से नाटक, कविता, चित्रकला एवं संगीत की हास्य-व्यंग्यपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं।
मूर्खों की अदालत बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का सबसे चर्चित आकर्षण “मूर्खों की अदालत” एपिसोड रहा, जिसमें समाज की वास्तविक संवेदनाओं को व्यंग्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। अदालत में जज की भूमिका आशु कवि अनिल बोहरे ने निभाई, जबकि अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य की प्रस्तुति में दिखाया गया कि समाज अक्सर सच्चे, सरल और भावनात्मक लोगों को ‘मूर्ख’ कह देता है।
अदालत में प्रस्तुत एक प्रसंग में बताया गया कि एक महिला पूरी रात अपनी बीमार मां के लिए पानी लेकर खड़ी रही ताकि मां के जागने पर उसे प्यास न लगे। इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया गया कि जिसे समाज मूर्खता समझता है, वह वास्तव में त्याग, प्रेम श्रद्धा और संस्कार का प्रतीक है।
दूसरे प्रसंग में एक पात्र स्वयं को नामहीन बताकर यह तर्क देता है कि नाम न होने पर यमराज भी उसे पहचान नहीं पाएंगे। इस हास्यपूर्ण संवाद के माध्यम से वर्तमान समाज में छल-कपट और दिखावे पर आधारित बुद्धिमत्ता पर तीखा व्यंग्य किया गया। अंततः अदालत ने निर्णय दिया कि समाज को ऐसे सरल और ईमानदार लोगों की आवश्यकता है, क्योंकि इन्हीं मूल्यों से मानवता और प्रकृति का संतुलन बना हुआ है।
नीदरलैंड बना ‘विश्व महामूर्ख’
मूर्खिस्तान के ‘जज’ आशु कवि अनिल बोहरे ने व्यंग्यात्मक शैली में संयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य को नीदरलैंड भेजते हुए वहां के प्रधानमंत्री की सादगी, अपराध-मुक्त व्यवस्था, मुफ्त शिक्षा-चिकित्सा और शून्य भ्रष्टाचार जैसी ‘मूर्खताओं’ के आधार पर नीदरलैंड को ‘विश्व महामूर्ख’ घोषित किया।
हास्य-व्यंग्य से सामाजिक संदेश
काका हाथरसी के प्रसिद्ध पात्रों—तानाशाह ढपोरशंख, लठ्ठा सिंह, खाऊलाल एवं झपट्टा सिंह—की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खूब हंसाया। कार्यक्रम में जातिवाद, भ्रष्टाचार, दिखावटी दावतों, प्रशासनिक लापरवाही, प्रदूषण तथा सामाजिक विसंगतियों पर तीखे व्यंग्य किए
काव्य पाठ सत्र में देशभर से आए कवियों ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं से समां बांधा। भारतीय परंपराओं से दूर होती जीवनशैली, प्रकृति से छेड़छाड़ और सामाजिक मूल्यों के क्षरण पर व्यंग्य करते हुए सकारात्मक संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी रही
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, साहित्य प्रेमी एवं महिला शक्ति की सक्रिय सहभागिता रही।
काका हाथरसी के मूर्खिस्तान के रौल करने बालों में पंडित हाथरसी के हास्यमयी रौल, सोनाली बार्ष्णेय के संचालन में जातिवाद, भ्रष्टाचार,56 भोग भण्डारों दावतों,सरकारी अधिकारियों की लापरवाही, प्रदूषण पर मानवीय गधो की मूर्खताओं का मूर्खिस्तान अदालत में शानदार प्रर्दशन करने बालों में व्यापारी नेताओं में सुरेश अग्रवाल के साथ लूटपाटी तथा उनकी वेदना
हम हैं व्यापारी, है बडी लाचारी
गधे समझ रोंदे,मूर्ख बना लूटे जाते
राजकुमार कोठीवाल, वकीलों में प्रेम सिंह यादव,रामदास , जितेन्द्र गौतम ,समाज सेवी अविनाश पचौरी,जीवन लाल शर्मा, महादेव अटल,सुख प्रीत सुक्खी,रन सिंह सिसौदिया ने गधों के दूध से केंसर भगा मूर्खता दिखा दी।
बैनर पर गधों की रेलमपेल में डा मुरारी लाल ने बांसुरी बादन से काका हाथरसी को पवन पहलवान के पेट चीर पैदा कर मूर्खता का परचम लहरा दिया,
गधा पूजा से शुरू काव्य पाठ यूं हुआ
ऐ सेडू राजा,मूर्खों में तेरा बाजा,
मारने दुलत्ती मूर्खिस्तान आजा
मूर्खमई कविता पढ़ने बाली मूर्ख हस्तीयां थीं भावना गुप्ता बनारस,आगरा से रवीन्द्र शर्मा रवि,सनसनी, संजय कुमार, रूपेश कुलश्रेष्ठ, उदयवीर ऐटा, प्रमोद विषधर सिकन्दराऊ,गाफिल स्वामी इगलास,डा मीता कौशल,वीना गुप्ता, चाहतशर्मा, योगिताबार्ष्णेय, श्याम बाबू चिंतन, प्रभूदयाल प्रभू,चेतन उपाध्याय,बीरेंद्र पाठक,चाचा।
मूर्खिस्तान में मठा बिलोने हुक्का,सुराई,बरौसी,ओक से पानी पीने, दरवाजे पर गाय,आंगन में तुलसी जैसी आदतें छोड़ने की मूर्खताओं पर व्यंग किया।मूर्खता यह थी कि राजू भाई देहली,रूपम कुशवाह,
पूरन सागर गधों को घास चराते रह गये।
गधों पर सवार मूर्खों के रेले में उपस्थित नारी शक्तियों में अन्नु विमल,डा सुनीता उपाध्याय,अल्का बार्ष्णेय,बाला शर्मा,अनीता गोयल,डा प्रतिभा भारद्वाज,इन्द्रा जैसवाल,रैनू जैन, सुचेता जौन,सखी सीमा अग्रवाल,कल्पना गुप्ता,रूबी बार्ष्णेय, डिम्पल बार्ष्णेय,श्वेता बार्ष्णेय, प्रियांशी बार्ष्णेय,पूजा वर्मा,माधवी सिंह,अनीता सिंह,
साहित्य प्रेमीयों में नन्नूमल गुप्ता,योगा पंडित,विजय सिंह प्रेमी,ऋषी कौशिक,विद्यासागर विकल, गोपाल चतुर्वेदी,योग गुरु रूपराम,पप्पन पहलवान,बालो गुरु,डा जितेन्द्र शर्मा,सर्वेश शर्मा,दिलीप पोद्दार, ओमप्रकाश गुप्ता, बासुदेव उपाध्याय, राजकुमार पचौरी,चौ जयवीर सिंह,डा अमरेन्द्र श्रीवास्तव, हरीशंकर वर्मा,बाबा देवी सिंह निडर,विनोद गुप्ता,चन्द्रप्रकाश गौतम, जयशंकर पारासर,डा प्रवीन देव रावत,सुरेन्द्र कुमार,एम पी गोयल,दीपक गौतम एड, रोहित कुमार, बीरेंद्र सिंह एड, धनीराम,अवधेश शर्मा, शिवम् त्यागी,राकेश राजू, अनिल अग्रवाल,सचिन शर्मा,
व्यवस्था सहयोगी डा भरत यादव,कपिल नरूला, ग़ाफ़िल स्वामी,बालकवि बिष्णु,सन्तोष उपाध्याय, पीयूष अग्निहोत्री आदि थे।
अनिल बौहरे तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की मूर्खिस्तान भंग की घोषणा के बाद आभार पूर्व प्राचार्या डा मीता कौशल ने प्रकट कर महामूर्ख सम्मेलन का तम्बू उखाड दिया।नारियों ने नरों को पछाड़ दिया।