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डॉ. जगदीश लवानिया स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य रसधारा का दिखा अद्भुत संगम ,देर रात तक श्रोता बजाते रहे तालियां ,लगाते रहे ठहाके

ज्ञान कला संजीवनी समिति तथा ब्रज कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में हुआ भव्य आयोजन

हाथरस। अलीगढ़ रोड स्थित एक रिजोर्ट के सभागार में ज्ञान कला संजीवनी समिति तथा ब्रज कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉ. जगदीश लवानिया स्मृति अखिल भारतीय कवि सम्मेलन अभूतपूर्व रूप से सफल रहा। श्रोताओं से खचाखच भरे सभागार में देर रात तक ठहाकों, तालियों और काव्य रसधारा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ शारदा एवं डॉ. जगदीश लवानिया के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन राजेश कुमार सिंह डिविजनल कमांडर होमगार्ड्स, आर.के. सिंह डिप्टी कमिश्नर जीएसटी, प्रद्युम गुप्ता डिप्टी कमिश्नर जीएसटी, दीपक कुमार अग्निशमन अधिकारी, उदित नारायण मिश्र लखनऊ, ब्रज कला केन्द्र के केंद्रीय उपाध्यक्ष गजेन्द्र शर्मा, दीपक गोयल एवं अन्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ पं. मुखिया जी के मंत्रोच्चार तथा पं. गणेश चन्द्र बशिष्ठ के शंखनाद से हुआ।


कवि सम्मेलन का संचालन हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने अपने विशिष्ट अंदाज में किया। सरस्वती वंदना डॉ. रुचि चतुर्वेदी (आगरा) ने प्रस्तुत की। इसके बाद कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मध्यम सक्सेना (बरेली) ने सुनाया— “ऊधौ ये तौ बतादो कि,
प्रेम के रंग पै ज्ञान कौ रंग चढ़ाओगे कैसे।”
लटूरी लठ्ठ (टूंडला) ने कहा— “मेरे हाथ में दुख की कोई रेखा यूँ नहीं है,
माता-पिता के अलावा भगवान देखा नहीं है।”
अमन अक्षर (इंदौर) ने रामभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियाँ सुनाईं— “सारा जग है प्रेरणा, प्रभाव सिर्फ राम हैं,
भाव सूचियाँ बहुत हैं, भाव सिर्फ राम हैं।”
श्रद्धा शौर्य (नागपुर) ने वीर रस में कहा— “रानी झांसी मर्दानी क्यों होती,
जब रानी स्वयं भवानी थी।”
डॉ. अर्जुन सिंसौदिया ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा— “मेरे बच्चो कला सीखो, समूचे व्यूह भेदन की,
तुम्हें अभिमन्यु की भाँति बड़ा संग्राम लड़ना है।”
डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने कृष्ण भक्ति रस में सुनाया— “मदन मुरारी त्रिपुरारी जिन संग खेले,
शेष अवतारी वो तौ हल के धरैय्या है।”
बलराम श्रीवास्तव (मैनपुरी) ने श्रृंगार रस में कहा— “एक प्यासी नदी थी मेरी जिंदगी,
तुम मिलीं तो लगा जल प्रवाहित हुआ।”
अंत में संचालक अनिल अग्रवंशी ने अपनी पंक्तियों से समापन किया— “हँसना हँसाना आदत है मेरी,
अपना बनाना आदत है मेरी।”
इस अवसर पर उपस्थित नारी शक्ति में अनु विमल, इन्द्रा जैसवाल, डॉ. प्रतिभा भारद्वाज, अल्का, वंदना, श्वेता, डिंपल, रूबी वार्ष्णेय, रूपम कुशवाह, कशिश गर्ग एडवोकेट, महादेवी, आमना बेगम, काजल चौधरी, ममता मौर्य आदि प्रमुख रहीं।
श्रोताओं में उपस्थित चिकित्सक डॉ. मुरारीलाल, राजू गवार, रमेश गुलाठी, चतुर सिंह, नितिन मिश्रा, मुकेश चन्द्रा, संजीव अग्रवाल, दिनेश माहेश्वरी, विनय वर्मा, आस मोहम्मद सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं में प्रेम सिंह यादव, दिलीप पोद्दार, विनोद अग्रवाल, सुनील वर्मा, संजय दीक्षित आदि उपस्थित रहे।
कवियों में श्याम बाबू चिंतन, ग़ाफ़िल स्वामी, प्रभूदयाल दीक्षित ‘प्रभू’, देवी सिंह निडर, पूरन सागर, जयप्रकाश पचौरी, प्रदीप पंडित, सुखप्रीत सिंह सुक्खी, जसवीर सिंह, बालकवि बिष्णु, मोहन ब्रजेश, हरिनाम सांचा आदि शामिल रहे।
समाजसेवियों में डॉ. जितेन्द्र स्वरूप शर्मा फौजी, अनिल वार्ष्णेय तेल वाले, डॉ. जितेन्द्र शर्मा, गजेन्द्र चाहर, ब्रजेश बशिष्ठ, योगा पंडित, मनोज अग्रवाल, बौहरे ऋषि कौशिक, अविनाश पचौरी, जयशंकर पाराशर, विजय सिंह प्रेमी, हरीशंकर वर्मा, जीवनलाल शर्मा, मुकेश शर्मा चन्दन इत्र वाले, जयवीर सिंह, चन्द्रशेखर विमल, दाऊदयाल गौड़, सत्यप्रकाश भैकुरी, सत्यप्रकाश रंगीला, श्याम बिहारी अग्रवाल, ललितेश गुप्ता, शेखर वार्ष्णेय, भूपेंद्र वर्मा, संजय कप्तान, नवल-कपिल नरूला, ओमप्रकाश गुप्ता, चमनेश राजपूत, जैनुद्दीन जैन, दिनेश सिंह सभासद आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक प्रगल्भ लवानिया (असिस्टेंट कमिश्नर एक्साइज), ललित लवानिया, सूत्रधार गीतकार डॉ. बिष्णु सक्सेना, संरक्षण श्रीमती विमलेश लवानिया रहीं। कार्यक्रम संचालन संयोजक डॉ. प्रीती लवानिया (सचिव, ज्ञान कला संजीवनी) तथा सह-संयोजक चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य (अध्यक्ष, ब्रज कला केन्द्र) ने अत्यंत कुशलता से सम्पूर्ण व्यवस्था संभाली।
विशेष रूप से सह-संयोजक चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने अतिथियों के स्वागत, कवियों के समन्वय तथा सम्पूर्ण आयोजन को गरिमामय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सक्रिय उपस्थिति, संगठन क्षमता और साहित्यिक समर्पण ने कार्यक्रम को नई ऊँचाई प्रदान की, जिसकी सभी अतिथियों एवं श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम में डॉक्टर जगदीश लवानिया स्मृति सम्मान से ब्रजभाषा की वरिष्ठ और प्रसिद्ध कवयित्री डॉ रूचि चतुर्वेदी जी को लवानिया परिवार ने अंग वस्त्र उड़ाकर प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह एवं 21000 रुपए की राशि देकर सम्मानित किया
व्यवस्था अदिति लवानिया ने संभाली तथा अध्यक्षता आशु कवि अनिल बौहरे ने की। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता का एक यादगार उत्सव बन गया।

आशीष सेंगर

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