दृढ़मति महिला मंडल ने अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर किया गन्ने का रस वितरत
हाथरस। अक्षय तृतीया पर्व के मौके पर दृढ़मति महिला मंडल द्वारा नयागंज स्थित 1008 श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के सामने इच्छुक रस गन्ने का रस वितरत किया था महिला पुरुष दिन भर बितरण करने में लगे रहे। बाल पंडित विशाल जैन वेद ने कहा कि जैन धर्म में अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) का अत्यंत ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) द्वारा 6 माह के उपवास के पश्चात जब वह आहार के लिए उठे तब किसी को भी ज्ञान न होने के कारण कि दिगम्बर जैन मुनि को कैसे आहार (भोजन) कराया जाता है इस कारण उनका अगले 7 माह तक भी आहार न हो सका तब अंत में वह हस्तिनापुर पहुंचे और 13 माह की कठोर तपस्या के बाद हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस कुमार को अपने पिछले भव की स्मृति से दिगम्बर जैन मुनि को आहार देने की विधि ज्ञात हुई , तब जाकर वैशाख शुक्ल तृतीय के दिन राजा श्रेयांस के हाथों से गन्ने के रस (इक्षु-रस) ग्रहण कर अपना पहला पारणा (आहार) ग्रहण किया । जो इस युग में आहार दान की शुरुआत बना। तप और त्याग का प्रतीक: यह दिन संयम, तपस्या और आत्म-संयम का सर्वोच्च प्रतीक है दान का अक्षय तृतीया पर विशेष महत्व है। जैन श्रद्धालु इस दिन को ‘अक्षय’ (जो कभी क्षीण न हो) मानते हैं। इस दिन आहार दान, ज्ञान दान, औषधि दान, और अभय दान देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गन्ने के रस का वितरण: इस पावन अवसर पर मंदिरों में भगवान ऋषभदेव का अभिषेक और पूजन किया जाता है, और श्रद्धालुओं को गन्ने का रस वितरित किया जाता है। वर्शी-तप का समापन: इस दिन को श्रद्धालु अपनी एक वर्ष की कठिन तपस्या ‘वर्शी-तप’ के पारणा के रूप में भी मनाते हैं। इस मौके पर मंजू जैन सोगानी, संतोष जैन लवी जैन, इला जैन जैन उषा जैन सुनीता,जैन नंदिनी,जैन शालिनी जैन कीर्ति, रूही, प्रीति,जैन मीनाक्षी जैन ममता जैन रश्मी जैन प्रज्ञा जैन शिल्पी जैन , खुशबू जैन , वंदिता जैन प्रियंका जैन , चंचल जैन , दीप्ति जैन, जुली जैन, मंजू सोगानी, संतोष जैन, वंदिता जैन,मीनू जैन, मधु जैन, मंजू जैन, ममता जैन, मिथलेश जैन, प्रभा जैन, शकुंतला जैन, कल्पना जैन, प्रियंका जैन आदि मौजूद थी।

