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प्रभु श्रीराम का वनगमन जीवन की सीख है : दीपक ,शताब्दी नगर में आयोजित श्रीराम कथा में कथा व्यास ने मार्मिक प्रसंग का भावपूर्ण किया वर्णन

अलीगढ़ : जीवन उतार चढ़ाव का है, धूप छांव का खेल है। कभी सुख तो कभी दुख है। इसलिए जीवन में कभी घबराना नहीं चाहिए। कष्ट में भी सामान्य रहना चाहिए।
श्रीराम कथा में सोमवार को जब कथा व्यास दीपक मिश्रा ने राम वनगमन का वर्णन किया तो श्रद्धालुओं की आंखों से आंसुओं की जलधारा निकल पड़ी। बहुत से श्रद्धालु कथा के मर्म को समझते हुए बार बार भावुक हो उठे।
शताब्दी नगर क्षेत्र इन दिनों धर्म नगरी में परिवर्तित हो गया है। कथा व्यास दीपक मिश्रा महाराज द्वारा रामचरित मानस के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन से श्रद्धालु कथा के शब्द शब्द का अनुसरण कर रहे हैं। व्यास ने कहा कि राम वनगमन जीवन जीने की सीख है। प्रभु श्रीराम को अयोध्या जैसा राज्य मिलने वाला था मगर दूसरे ही पल उन्हें वनवास का आदेश मिल गया। उन्होंने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। वनवास देने वाली माता कैकेई पर भी तनिक क्रोधित नहीं हुए। राजकुमार के वस्त्र त्यागकर वलकल धारण किया और वन के लिए चल पड़े। दीपक महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में भी कई बार ऐसा होता है। उसे सुख मिलने वाला होता है दूसरे पल वह कष्ट से घिर जाता है। ऐसे में वह विचलित हो जाता है। मगर, यह उसके धैर्य की परीक्षा होती है। इसलिए कष्ट में घबराना नहीं चाहिए। सामान्य रहना चाहिए। जिस प्रकार 14 वर्ष वनवास में व्यतीत करके प्रभु अयोध्या लौटे, वैसे ही आपके जीवन में भी सुख निश्चित लौटेगा। यदि प्रभु श्रीराम के जीवन से मनुष्य सीख लेता है वह कष्ट का भी डटकर मुकाबला करता है। कथा में मोहन कठेरिया, रेनू कठेरिया, बीना शर्मा, अखिलेश तिवारी, अजीत चौधरी, सुरेन्द्र चौधरी,
गायत्री चौधरी, ज्योति शर्मा, उर्मिला चौधरी, सुजाता चौहान, राजू पंडित, मनधीर शर्मा, अनुपम आदि मौजूद थे।

आशीष सेंगर

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